सद्धर्म की देशना
ध्यान मार्गदर्शन, धर्म-विनय देशनाओं और प्रामाणिक बौद्ध स्रोतों के माध्यम से भगवान बुद्ध की गहन शिक्षाओं को जानें।
"Sabbe saṅkhārā aniccā"
सभी संस्कार (उत्पन्न वस्तुएं) अनित्य हैं।
— धम्मपद, गाथा २७७
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परिचय
आदरणीय
नायक सयादो एवं वरिष्ठ कम्मट्ठानाचार्य (ध्यान गुरु)
पा-अउक तावया ध्यान केन्द्र,
प्यिन उ ल्विन, म्यान्मार
म्यान्मार के सगैंग डिवीजन, कउ लिन टाउनशिप के काइंग वन गांव में जन्म।
कउ लिन, सगैंग में श्रामणेर (नवदीक्षित) के रूप में प्रव्रज्या ग्रहण की।
कउ लिन में प्राथमिक त्रिपिटक बौद्ध ग्रंथों का विधिवत अध्ययन।
महाविशुद्धायोन शिक्षा केन्द्र, बाहान, यांगून में उच्च बौद्ध शास्त्रों का अध्ययन किया।
१५ मार्च १९९५ को बाहान, यांगून में उच्च भिक्षु उपसम्पदा प्राप्त की।
सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त 'धम्माचार्य' (Dhammācariya) उपाधि अर्जित की।
महाविशुद्धायोन शिक्षा केन्द्र, यांगून में शिक्षक के रूप में अध्यापन शुरू किया।
मन्दालय के नये मसोयेइन केन्द्र में उच्च ग्रंथों का अध्ययन और वरिष्ठ भिक्षुओं को पढ़ाया। सन् २००३ में यांगून में प्रतिष्ठित 'अभिवंस' (Abhivaṃsa) उपाधि प्राप्त की।
मोन राज्य स्थित पा-अउक तावया ध्यान केन्द्र (मुख्य शाखा) में गहन ध्यान साधना की।
मसोयेइन केन्द्र, मन्दालय में अध्यापन किया और बीच-बीच में वन विहारों में एकांत साधना की।
पा-अउक तावया मुख्य केन्द्र में ध्यान साधना जारी रखी।
इंडोनेशिया के बातम द्वीप में वर्षावास व्यतीत कर ध्यान किया और सिंगापुर में धर्म देशना दी।
प्यिन उ ल्विन में पूज्य पा-अउक सयादो द्वारा संचालित ध्यान शिक्षक प्रशिक्षण में भाग लिया।
ताइवान में धर्म का प्रचार, अध्यापन और वर्षावास व्यतीत किया।
पा-अउक ध्यान केन्द्र (प्यिन उ ल्विन), मन्दालय में साधना, शिक्षण और वर्षावास। वर्तमान में पा-अउक केन्द्र के वरिष्ठ ध्यान शिक्षक (कम्मट्ठानाचार्य) हैं।
इंडोनेशिया, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, कंबोडिया, भारत, चीन, श्रीलंका और यूरोपीय देशों में ध्यान शिविरों का संचालन करते हैं।
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